इंजन ऑयल कब बदलना चाहिए? सही समय, कारण और तरीका

Engine Oil Change: When Why And How To Do It : नमस्कार। आज हम इंजन ऑयल के बारे में पूरे विस्तृत में जानकारी आपको देने वाले हैं जैसे की इंजन ऑयल कब , क्यों और कैसे बदले इस तरह की इंजन ऑयल के बारे में पूरी जानकारी आज इस लेखमें आपको मिलने वाली है जैसे कि हमने बताया इंजन ऑयल आपके वाहन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जो इंजन को सुरक्षित और चालू रखता है इसी को आज हम विस्तृत में आपको जानकारी देंगे तो शुरू करते हैं।

इंजन ऑयल का मतलब क्या?

Engine Oil Change: When Why And How To Do It
इंजन ऑयल कब बदलना चाहिए? सही समय, कारण और तरीका

 

इंजन ऑयल खासकर बता ये तो गाड़ी के इंजन में इस्तेमाल होने वाला एक ज़रूरी लुब्रिकेंट है, जो मुख्य रूप से बेस ऑयल और अलग-अलग केमिकल कॉम्पोनेंट से बनता है। इसके एकत्रीकरण कोही हम इंजिन ऑइल कहते है। इंजन की हेल्थ और एफिशिएंसी बनाए रखने के लिए यह बहुत ज़रूरी है।

इंजन को स्मूदली चलाने के लिए, यह ऑयल इस तरह काम करता है: यह ऑयल इंजन के हिलने वाले मेटल पार्ट्स पर एक पतली लेयर बनाता है, जो पार्ट्स के बीच सीधे कॉन्टैक्ट को रोकता है और फ्रिक्शन और घिसाव को कम करता है। उसके बाद, कंबशन प्रोसेस से इंजन में बहुत ज़्यादा गर्मी पैदा होती है। ऑयल इस गर्मी को एब्ज़ॉर्ब करता है और घूमते समय इसे फैलाता है, जिससे इंजन का टेम्परेचर कंट्रोल होता है।

फिर, ऑयल इंजन के ऑपरेशन के दौरान पैदा हुए कार्बन पार्टिकल्स, गंदा कचरा और महीन मेटल पार्टिकल्स को एब्ज़ॉर्ब कर लेता है, जिससे इंजन अंदर से किसी भी चिंता न करने के कारक साफ रहता है ‌

इंजन ऑयल कैसे बदले?

इंजन ऑयल बदलने का पूरा तरीका नीचे दिए गए जरूरी सामान और तेल बदलने के स्टेप्स हमने दिए हैं:

इंजन ऑयल बदलने के लिए जरूरी सामान:

  1. नया इंजन ऑयल
  2. नया ऑयल फिल्टर
  3. रेंच (Wrench)
  4. ड्रेन पैन
  5. कीप (Funnel)
  6. सांप कपड़ा

इंजन ऑयल बदलने के स्टेप बाय स्टेप कार्य पद्धति:

१) इंजन को हल्का गर्म करें यानी गाड़ी को 5 मिनट के लिए स्टार्ट रखें। इसके बाद इससे तेल पतला हो जाता है और आसानी से बाहर निकल आता है और यह करने के बाद इंजन बंद कर दो।

२) गाड़ी को समतल जगह पर खड़ा करें यानी कर को समतल जमीन पर पर करें।

३) पुराना तेल निकाले। यह करते समय इंजन के नीचे लगे ऑयल ड्रेन बोल्ट को ढूंढें। फिर बोर्ड के नीचे ड्रेन पान रखें। और रेंच की मदद से बोल्ट को धीरे-धीरे खोलें और यह करने के बाद पूरा काला तेल बर्तन में गिरने दे।

४) ऑयल फिल्टर बदलें। यानी पुराने ऑयल फिल्टर को हटाकर नए ऑयल फिल्टर की रबर सील पर थोड़ा सा नया तेल लगाए। फिर नया ऑयल फिल्टर उसकी जगह पर कस दे।

५) ड्रेन बोल्ट वापस लगाए। मतलब जब पूरा पुराना तेल निकल जाए तो कपड़े से ड्रेन होल को साफ करें। फिर ड्रेन बोल्ट को वापस लगाकर रेंज से अच्छी तरह टाइट कर दें।

६) नया इंजन ऑयल डालें। यह करते वक्त इंजन के ऊपर लगे तेल कैप को खोलें। फिर कैप की मदद से सही मात्रा में नया इंजन तेल डालें और फिर से कैप को वापस बंद कर दें।

७) ऑयल लेवल चेक करें मतलब डिपस्टिक (Dipstick) निकालकर साफ करें फिर वापस डालकर तेल का लेवल चेक करें और तेल का लेवल मैक्स या तेरे बिंदु तक होना चाहिए।

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ऑयल को गाड़ी में कितनी बार बदलना चाहिए?

इंजन को स्मूदली चलाने और उसकी लाइफ बढ़ाने के लिए समय पर इंजन ऑयल बदलना बहुत ज़रूरी है। इंजन ऑयल कब बदलना है यह मुख्य रूप से आपके इस्तेमाल किए जाने वाले ऑयल के टाइप और गाड़ी के इस्तेमाल और उसके ड्यूरेशन पर निर्भर करता है। फिर भी अपने आसपास के मैकेनिक को पूछ कर ही आप यह कदम उठाइए।

ऑयल टाइप के हिसाब से बदलने का समय

मिनरल ऑयल कच्चा मिनरल ऑयल होता है यह प्राकृतिक कच्चे तेल से बनता है यह पुराने और साधारण इंजनों के लिए सही है यह दूसरे तेलों से सस्ता होता है लेकिन इसे जल्दी बदलना पड़ता है और इसकी एफिशिएंसी लिमिटेड होती है, इसलिए इसे हर ३,००० से ५,००० किलोमीटर या ३ महीने में बदलना चाहिए।

सेमी-सिंथेटिक ऑयल मिनरल और सिंथेटिक ऑयल का मिक्सचर होता है। यह मिनरल और सिंथेटिक तेल का मिला-जुला रूप है यह मिनरल ऑयल से बेहतर काम करता है और इसकी कीमत भी ठीक-ठाक होती है। यह मध्यम इस्तेमाल के लिए अच्छा है और इसे हर ५,००० से ७,५०० किलोमीटर पर बदलना चाहिए।

फुली सिंथेटिक ऑयल एक हाई-क्वालिटी लैब में बना ऑयल होता है। यह लैब में रासायनिक तरीके से बनाया जाता है यह हर तरह के मौसम में इंजन की रक्षा करता है और बहुत लंबे समय तक चलता है नहीं और महंगी गाड़ियों के लिए यह सबसे अच्छा तेल माना जाता है। यह इंजन को सबसे अच्छी प्रोटेक्शन देता है। इसे हर ८,००० से १५,००० किलोमीटर या 1 साल में बदलना चाहिए।

ऊपर दिए गए आंकड़े जनरल गाइडलाइंस हैं, लेकिन हर गाड़ी का डिज़ाइन अलग होता है, इसलिए आपकी गाड़ी के साथ आए मैन्युफैक्चरर के मैनुअल में दी गई गाइडलाइंस को फॉलो करना आपके लिए सबसे अच्छा और सेफ तरीका होगा।

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अगर महिनों के बराबरी में ऑयल कम इस्तेमाल होता है तो भी उसे क्यों बदलें?

अक्सर ग्राहक बार-बार पूछते हैं कि अगर हमारी गाड़ी कम इस्तेमाल होती है, और महीना में एक बार ही हम बाहर निकलते हैं? तो क्या हमें ऑयल बदलवाना चाहिए? इसका जवाब है हाँ, अगर आपकी गाड़ी एक महीने से कम भी चली हो, तो भी हर 6 महीने या 1 साल में ऑयल बदलने की सलाह मानना ​​सही रहता है।

ऐसा करने के कारण ये हैं: इंजन में मौजूद ऑयल हवा के संपर्क में आने से समय के साथ खराब होने लगता है और वहीं ऑयल की क्वालिटी खराब हो जाती है।

साथ ही, जब गाड़ी खड़ी होती है, तो हवा में नमी इंजन के अंदरतक जमा हो जाती है, जिससे ऑयल में पानी मिल जाता है, उसकी लुब्रिकेटिंग क्षमता कम हो जाती है और खराब ऑयल इंजन के पार्ट्स को रगड़ने से नहीं रोक पाता। और इंजन से आवाज आने लगती है।

जिससे इंजन जल्दी खराब हो सकता है। इसका मतलब है कि भले ही किलोमीटर पूरे न हुए हों, एक तय समय के बाद ऑयल बदलना गाड़ी की हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

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आपको तेल बदलने की समझ कब आनी चाहिए?

इंजन की लाइफ बढ़ाने और अपनी कार को आसानी से चलाने के लिए, समय पर ऑयल बदलना बहुत ज़रूरी है। आप नीचे दिए गए लक्षणों से ऑयल बदलने की ज़रूरत पहचान सकते हैं, जैसे कि जब ऑयल खराब हो जाता है, तो इंजन के पार्ट्स के बीच फ्रिक्शन बढ़ जाता है, जिससे इंजन से नॉर्मल से ज़्यादा तेज़ या बहुत बुरी आवाज आने लगती है

नया ऑयल हल्के शहद के रंग का या पीले रंग का होता है और इंजन में वेस्ट और कार्बन के एब्जॉर्ब होने की वजह से समय के साथ काला और गाढ़ा हो जाता है। अगर डिपस्टिक से ऑयल चेक करने पर यह काला दिखे, तो इसे बदलने की ज़रूरत है।

अगर कार के डैशबोर्ड पर ऑयल वॉर्निंग लाइट जलती है, तो इसका मतलब है कि इंजन में ऑयल कम है या ऑयल का प्रेशर कम हो गया है। ऑयल पुराना और खराब होने की वजह से, इंजन के पार्ट्स को घूमने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ज़्यादा फ्यूल जलता है और कार का माइलेज कम हो जाता है।

ऑयल इंजन के तापमान को कंट्रोल करने में मदद करता है। अगर ऑयल की क्वालिटी खराब हो जाती है, तो इंजन में फ्रिक्शन बढ़ जाता है और इंजन बार-बार ओवरहीट हो जाता है। और अगर आपको गाड़ी चलाते समय केबिन में या बाहर जले हुए ऑयल की बदबू आती है, तो हो सकता है कि ऑयल लीक होकर गर्म इंजन पर गिर रहा हो या ऑयल पूरी तरह खराब हो गया हो।

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इंजन तेल सीमित समय के बाद बदलने के नुकसान

सिमित समय पर इंजन ऑयल न बदलना गाड़ी के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है। देर से इंजन ऑयल बदलने से ये खतरे हो सकते हैं, जैसे नया ऑयल इंजन के अंदरूनी हिस्सों में स्मूदनेस बनाए रखता है, पुराना और खराब ऑयल उसकी विस्कोसिटी कम कर देता है, जिससे इंजन के चलने वाले हिस्सों में बहुत ज़्यादा फ्रिक्शन होता है और पिस्टन और बेयरिंग जैसे ज़रूरी हिस्से तेज़ी से घिस जाते हैं।

खराब तेल इंजन में अंदरूनी फ्रिक्शन और तनाव बढ़ाता है। इस तनाव को कम करने के लिए इंजन को ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है, जिससे गाड़ी का इंजन कंजम्पशन बढ़ता है और माइलेज कम होता है। तेल न सिर्फ़ लुब्रिकेंट का काम करता है, बल्कि यह इंजन के गर्मी सोखने वाले हिस्सों को ठंडा रखने में भी मदद करता है। पुराना तेल गर्मी सोखने की अपनी क्षमता खो देता है, जिससे इंजन बार-बार ओवरहीट होता है।

अगर तेल को लंबे समय तक न बदला जाए, तो यह एक गाढ़े काले कीचड़ में बदल जाता है। यह कीचड़ तेल के रास्ते को ब्लॉक कर देता है। इंजन में तेल की कमी के कारण इसके हिस्से आपस में लॉक हो जाते हैं, जिसे इंजन सीज़ कहते हैं। और अगर इंजन सीज़ हो जाता है या इसके हिस्से खराब हो जाते हैं, तो इंजन को पूरी तरह से खोलकर रिपेयर करना पड़ता है। इस बड़े रिपेयर का खर्च बहुत ज़्यादा होता है, जो समय पर तेल बदलने के खर्च से कई गुना ज़्यादा होता है।

अच्छा इंजन ऑयल आपको कैसा चुनना चाहिए?

इंजन ऑयल चुनने के लिए आपको अपनी गाड़ी के मैनुअल , मौसम और गाड़ी के इस्तेमाल का ध्यान रखना होता है। सही इंजन ऑयल चुनने का सबसे आसान तरीका नीचे हमने दिया है।

१) गाड़ी का ओनर्स मैन्युअल देखें जिसमें निर्माता कंपनी ने जो ग्रेड और टाइप बताया है वही आपको गाड़ी के लिए सबसे सुरक्षित और बेस्ट होता है। यह कंपनी की सलाह मानें।

२) विस्कोसिटी ग्रेड (Viscosity Grade) को समझे यानी तेल की बोतल पर 5W-30 या 10W-40 जैसा कोड लिखा होता है। इसमें W का मतलब विंटर है इसके पहले का नंबर जितना काम होगा (0W या 5W) तेल अत्यधिक ठंड में भी कुछ नहीं अच्छे से काम करेगा

बाद वाला नंबर (जैसे ३० या ४०) तेज गर्मी और हाई तापमान में तेल के गड़ेपन को बनाए रखने के लिए क्षमता दिखता है भारत के मौसम के लिए आमतौर पर 10W-30 , 10W-40 या 15W-40 का इस्तेमाल ज्यादा होता है।

३) क्वालिटी सर्टिफिकेशन चेक करें यानी बोतल पर APi SN या API SP (पेट्रोल गाडियां के लिए) और API CK-4 (डिजल के लिए) देखें S या C के बाद को लेटर वर्णमाला में जितना आगे होगा (जैसे P,N से बेहतर है) और की क्वालिटी उतनी आधुनिक होगी।

ऑयल फिल्टर इंजन ऑयल बदलते के समय बदले या नहीं?

हर बार इंजन ऑयल बदलते समय ऑयल फ़िल्टर बदलना गाड़ी की हेल्थ के लिए बहुत अच्छा होता है, ठीक वैसे ही जैसे ऑयल फ़िल्टर इंजन ऑयल को साफ़ रखने का काम करता है। फ़िल्टर इंजन के चलने पर उसमें जमा होने वाली धूल, बारीक मेटल पार्टिकल और कार्बन को सोख लेता है और साफ़ हवा देता है।

अगर आप नया तेल डालने के बाद भी पुराना फ़िल्टर इस्तेमाल करते हैं, तो उसमें जमा गंदगी नए तेल में मिल जाती है, जिससे नया तेल तुरंत खराब हो जाता है। जाम हुआ पुराना फ़िल्टर तेल के बहाव को रोकता है, जिससे इंजन के पुर्जे आपस में रगड़ खा सकते हैं और इंजन को नुकसान हो सकता है।

फ़िल्टर बदलने के फ़ायदे

  1. जैसे कि फिल्टर इंजन ऑयल में जमा होने वाली धूल मिट्टी और लोहे के बारीक कनों को सोख लेता है। जिससे साफ तेल मिलने से इंजन के अधूरूनी पार्ट्स आपस में रगड़ नहीं खाते जिससे इंजन की उम्र बढ़ती है
  2. इंजन का परफॉर्मेंस बेहतर होती है।
  3. नया ऑयल खराब होने से बचता है।
  4. माइलेज में ही अच्छी सुधार आता है।
  5. इंजन ओवरहीट नहीं होता।

इंजन तेल बदलने के बारे में आम  गलतियां

खराब होने पर यह काला हो जाता है, जैसे तेल का काला होने का मतलब यह नहीं है कि यह खराब है, तेल इंजन में गंदगी और कार्बन को साफ़ करने का काम करता है, इसलिए खराब होने पर यह काला हो जाता है, जिसका मतलब है कि यह अपना काम ठीक से कर रहा है।

सिंथेटिक तेल को कभी बदलने की ज़रूरत नहीं होती, जैसे सिंथेटिक तेल ज़्यादा समय तक चलता है। सच है, लेकिन यह मानना ​​कि इसे कभी बदलने की ज़रूरत नहीं होती, गलत है। इसे भी बदलने की ज़रूरत होती है। कुछ किलोमीटर या कुछ समय बाद।

जो कार कम चलाई गई हो, उसे इसकी ज़रूरत नहीं होती। अगर कार ऐसे ही पड़ी रहे, तो भी हवा में नमी और ऑक्सीडेशन की वजह से ऑयल खराब हो जाता है। इसलिए, अगर कार कम चलाई जाए, तो भी साल में एक बार ऑयल बदलना ज़रूरी है।

कोई भी ऑयल इस्तेमाल करें, क्योंकि हर इंजन का स्ट्रक्चर अलग होता है, इसलिए कंपनी के बताए गए ग्रेड का ही ऑयल इस्तेमाल करना चाहिए। गलत ऑयल इस्तेमाल करने से इंजन की लाइफ कम हो सकती है।

निष्कर्ष

मेरे प्यारे भाइयों आज हमने इस लेख में आपको यह बताने की कोशिश की है कि इंजन ऑयल मतलब क्या? इंजन ऑयल कितने प्रकार के होते हैं? और इंजन ऑयल किन समय बदलने चाहिए जिनके कारण आपकी कार स्मूथ और बिना किसी मगजमारी के चल सके? हमने इस लेख में आपके इंजन के आधारित सभी प्रश्नों के उत्तर आपको मिल जाए इसकी मनपूर्वक कोशिश किया है।

ऐसे ही हमने बाढ़ में कार खराब हो गई तो इंश्योरेंस कैसे पाए इस पर ही लेख लिखा है और इस घनी बारिश में विंडशील्ड को कैसे साफ रखें इस पर भी हमने बहुत सारे उपाय के साथ लेख लिखा है जिन को पढ़कर आप अपनी गाड़ियों का ध्यान रख सके।

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