कर्नाटक हमेशा से भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्रांति का अगुआ रहा है। सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया, बेंगलुरु, न केवल ईवी स्टार्टअप्स का केंद्र है, बल्कि यहां देश में सबसे अधिक ईवी अपनाने की दर भी देखी गई है। हालांकि, अप्रैल 2026 तक आते-आते राज्य में ईवी का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। पिछले एक दशक से चली आ रही ‘100% रोड टैक्स छूट’ की सुविधा अब इतिहास बन गई है।
कर्नाटक मोटर वाहन कराधान (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत, राज्य सरकार ने अब इलेक्ट्रिक कारों और बसों पर एक श्रेणीबद्ध (Graded) Karnataka EV Road Tax 2026 प्रणाली लागू कर दी है। जहां पहले इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकरण के समय लगभग शून्य कर लगता था, वहीं अब वाहन की कीमत के आधार पर 5% से 10% तक का रोड टैक्स अनिवार्य है। हालांकि, राहत की बात यह है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को फिलहाल इस कर दायरे से बाहर रखा गया है।
इस लेख का मुख्य उद्देश्य नए खरीदारों को Karnataka EV Road Tax 2026 के प्रावधानों के प्रति वित्तीय स्पष्टता प्रदान करना है। हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि ₹10 लाख से कम की बजट कारों से लेकर प्रीमियम ईवी तक, आपकी जेब पर कितना अतिरिक्त भार पड़ने वाला है। यह जानकारी आपको 2026 में सही वाहन और बजट चुनने में मदद करेगी।
कर्नाटक ईवी नीति का इतिहास
कर्नाटक की इलेक्ट्रिक वाहन यात्रा साल 2017 में शुरू हुई, जब यह ईवी नीति बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। 2017 से 2024 की शुरुआत तक, राज्य सरकार ने ‘जीरो टैक्स’ की एक आक्रामक नीति अपनाई थी। इसके तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर, दोनों पर 100% रोड टैक्स छूट दी गई थी। इस प्रोत्साहन का उद्देश्य बेंगलुरु और मैसूर जैसे शहरों में वायु प्रदूषण कम करना और कर्नाटक को ‘ईवी कैपिटल’ के रूप में स्थापित करना था। इसी का परिणाम था कि कर्नाटक में ईवी पंजीकरण की संख्या ने रिकॉर्ड स्तर को छू लिया।
हालांकि, साल 2024 में ₹25 लाख से अधिक की कारों पर 10% टैक्स लगाकर इस छूट को सीमित किया गया, जो 2026 के व्यापक संशोधनों की नींव बना। सरकार द्वारा टैक्स लगाने के पीछे दो मुख्य कारण रहे: राजस्व घाटा और इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग। परिवहन विभाग के अनुसार, लाखों वाहनों को टैक्स फ्री करने से राज्य के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा। इसके अलावा, चार्जिंग स्टेशनों के जाल को बिछाने और समर्पित ईवी लेन जैसे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सरकार को भारी धन की आवश्यकता थी।
भारत के अन्य राज्यों की तुलना में कर्नाटक अब एक संतुलित मॉडल अपना रहा है। जहां दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य अभी भी विशिष्ट श्रेणियों में भारी सब्सिडी दे रहे हैं, वहीं कर्नाटक अब तमिलनाडु और महाराष्ट्र की तरह ‘परिपक्व बाजार’ की श्रेणी में आ गया है, जहां प्रोत्साहन के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। 2026 का यह बदलाव यह स्पष्ट करता है कि अब ईवी केवल एक नई तकनीक नहीं, बल्कि मुख्यधारा का हिस्सा बन चुकी है।
Karnataka EV Road Tax 2026 : मुख्य बदलाव
कर्नाटक सरकार द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर लगाने का निर्णय रातों-रात नहीं लिया गया, बल्कि यह एक सुनियोजित विधायी प्रक्रिया का परिणाम है। इस बदलाव का आधार कर्नाटक मोटर वाहन कराधान (संशोधन) अधिनियम, 2026 है। इस अधिनियम को राज्य विधानसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद 9 अप्रैल, 2026 को माननीय राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त हुई और इसके ठीक अगले दिन, यानी 10 अप्रैल 2026 से इसे पूरे राज्य में आधिकारिक तौर पर प्रभावी कर दिया गया। यह तिथि कर्नाटक के ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुई क्योंकि इसने लगभग एक दशक से चली आ रही पूर्ण कर-मुक्त व्यवस्था को समाप्त कर दिया।
नियमों का दायरा: किन वाहनों पर कर लगेगा?
नए अधिनियम के तहत कर का दायरा काफी विस्तृत रखा गया है, लेकिन इसे श्रेणीबद्ध तरीके से लागू किया गया है ताकि आम आदमी पर बोझ कम हो सके। मुख्य बदलाव निम्नलिखित श्रेणियों में देखे जा सकते हैं:
- इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर (निजी कारें): यह सबसे अधिक प्रभावित होने वाला वर्ग है। अब ₹10 लाख की शुरुआती कीमत वाली कारों से लेकर करोड़ों की लग्जरी ईवी तक, सभी को उनके ‘एक्स-शोरूम’ मूल्य के आधार पर निर्धारित प्रतिशत में लाइफटाइम रोड टैक्स देना होगा।
- इलेक्ट्रिक बसें और कमर्शियल वाहन: निजी परिवहन के साथ-साथ, वाणिज्यिक उपयोग में आने वाली इलेक्ट्रिक बसों और मालवाहक वाहनों को भी अब कर के दायरे में लाया गया है। पहले इन वाहनों को ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए पूरी छूट दी गई थी।
- अंतर-राज्यीय पुन: पंजीकरण (Re-registration): यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य राज्य (जैसे दिल्ली या महाराष्ट्र) से अपनी पुरानी इलेक्ट्रिक कार कर्नाटक लाता है, तो उसे भी नए स्लैब के अनुसार कर का भुगतान करना होगा।
किन्हें मिली है राहत?
इस सख्त संशोधन के बावजूद, सरकार ने सूक्ष्म गतिशीलता (Micro-mobility) को बढ़ावा देने के लिए कुछ रियायतें बरकरार रखी हैं:
- इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर: मध्यम वर्ग और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए, इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक को फिलहाल इस टैक्स स्लैब से बाहर रखा गया है। 2026 के नियमों के अनुसार, इन पर अभी भी 0% रोड टैक्स लागू है।
- इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ऑटो रिक्शा): सार्वजनिक परिवहन के इस किफायती साधन को भी फिलहाल कर से छूट दी गई है ताकि ड्राइवरों की आजीविका प्रभावित न हो।
संक्षेप में, 10 अप्रैल 2026 के बाद कर्नाटक में ईवी खरीदना एक महंगा सौदा बन गया है, विशेष रूप से मध्यम और प्रीमियम श्रेणी की कारों के लिए। यह बदलाव दर्शाता है कि सरकार अब ईवी को एक नवजात तकनीक के बजाय एक स्थापित उद्योग के रूप में देख रही है।
विस्तृत टैक्स स्लैब और दरें
कर्नाटक मोटर वाहन कराधान (संशोधन) अधिनियम, 2026 ने इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक स्पष्ट और त्रि-स्तरीय (Three-tier) कर संरचना पेश की है। यह संरचना वाहन की ‘एक्स-शोरूम’ कीमत पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि वाहन जितना महंगा होगा, कर की दर उतनी ही अधिक होगी। आइए, प्रत्येक श्रेणी को विस्तार से समझते हैं:
1. इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर (निजी कारें)
निजी कारों के लिए तीन मुख्य स्लैब निर्धारित किए गए हैं, जो बाजार में उपलब्ध विभिन्न मॉडलों को कवर करते हैं:
- ₹10 लाख से कम (5% टैक्स): यह स्लैब विशेष रूप से उन खरीदारों के लिए है जो बजट ईवी (जैसे MG Comet या Tata Tiago EV का बेस मॉडल) चुनते हैं। यदि आपकी कार की कीमत ₹8 लाख है, तो आपको ₹40,000 का लाइफटाइम रोड टैक्स देना होगा। यह कदम किफायती इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है।
- ₹10 लाख से ₹25 लाख (8% टैक्स): मध्यम श्रेणी की एसयूवी (जैसे Tata Nexon EV या Mahindra XUV400) इस दायरे में आती हैं। इस श्रेणी में टैक्स की दर 8% रखी गई है। उदाहरण के लिए, ₹15 लाख की कार पर आपको ₹1.20 लाख टैक्स देना होगा। यह श्रेणी सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी है, और इस टैक्स वृद्धि का असर मध्यवर्गीय परिवारों के बजट पर स्पष्ट दिखेगा।
- ₹25 लाख से ऊपर (10% टैक्स): प्रीमियम और लग्जरी ईवी के लिए सरकार ने सबसे अधिक 10% की दर तय की है। हालांकि यह दर 2024 से ही प्रभावी थी, लेकिन 2026 के अधिनियम ने इसे स्थायी रूप से कानूनी रूप दे दिया है।
2. इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (स्कूटर और बाइक): 0% छूट
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट के लिए राहत भरी खबर यह है कि सरकार ने इन्हें अभी भी 0% रोड टैक्स के दायरे में रखा है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं: पहला, दोपहिया वाहन आम आदमी और डिलीवरी पार्टनर्स की जीवन रेखा हैं। दूसरा, सरकार चाहती है कि पेट्रोल स्कूटरों से इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट होने की प्रक्रिया निर्बाध बनी रहे। हालांकि, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि यह छूट केवल मार्च 2027 तक के लिए बढ़ाई गई है, जिसके बाद इन पर भी 3% से 5% का सांकेतिक टैक्स लगाया जा सकता है।
3. कमर्शियल वाहन और इलेक्ट्रिक बसें
वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए नए प्रावधानों के तहत, निजी ऑपरेटरों द्वारा चलाई जाने वाली इलेक्ट्रिक बसों और मालवाहक वाहनों पर अब 5% का लाइफटाइम टैक्स या वार्षिक कर का विकल्प दिया गया है। इससे पहले ये पूरी तरह मुक्त थे। हालांकि, राज्य परिवहन निगम (KSRTC/BMTC) की बसों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं ताकि सार्वजनिक परिवहन की लागत न बढ़े।
4. अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ‘रोड टैक्स’ की गणना सब्सिडी (जैसे
FAME-II या राज्य सब्सिडी) से पहले की मूल कीमत पर की जाएगी। इसके अलावा, रजिस्ट्रेशन फीस और ‘स्मार्ट कार्ड’ शुल्क पहले की तरह ही लागू रहेंगे। यह विस्तृत संरचना दर्शाती है कि कर्नाटक सरकार अब ‘प्रोत्साहन मॉडल’ से निकलकर ‘राजस्व मॉडल’ की ओर बढ़ चुकी है, ताकि सड़क रखरखाव और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्थायी फंड जुटाया जा सके।

पुराने बनाम नए नियम: एक तुलनात्मक विश्लेषण
10 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए नए नियम कर्नाटक में ईवी खरीदारों के लिए एक बड़ा वित्तीय बदलाव लेकर आए हैं। 2024 तक जहां ₹25 लाख से कम की कारों पर शून्य रोड टैक्स था, वहीं अब सभी चार-पहिया ईवी को कर के दायरे में शामिल कर लिया गया है।
नीचे दी गई तालिका 2024 और 2026 के बीच टैक्स स्लैब के बड़े अंतर को स्पष्ट करती है:
| वाहन की श्रेणी (Ex-showroom) |
2024 टैक्स दर |
2026 टैक्स दर (वर्तमान) |
| ₹10 लाख तक |
0% |
5% |
| ₹10 लाख से ₹25 लाख |
0% |
8% |
| ₹25 लाख से ऊपर |
10% |
10% (कोई बदलाव नहीं) |
| इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर |
0% |
0% |
ऑन-रोड कीमत पर वास्तविक अंतर: उदाहरण के साथ
इस बदलाव का सबसे गहरा असर मध्यम श्रेणी की इलेक्ट्रिक कारों पर पड़ा है। आइए इसे दो लोकप्रिय उदाहरणों से समझते हैं:
- बजट कार (जैसे Tata Tiago EV): यदि कार की एक्स-शोरूम कीमत ₹9 लाख है, तो 2024 में इस पर ₹0 रोड टैक्स लगता था। 2026 के नए 5% नियम के बाद, अब खरीदार को सीधे ₹45,000 का अतिरिक्त रोड टैक्स देना होगा।
- मिड-रेंज SUV (जैसे Tata Nexon EV): ₹16 लाख की एक्स-शोरूम कीमत वाली कार पर पहले कोई रोड टैक्स नहीं था। अब 8% के नए स्लैब के अनुसार, खरीदार को ₹1,28,000 का भुगतान करना होगा।
यह तुलना स्पष्ट करती है कि 2026 में ईवी खरीदना अब केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता नहीं, बल्कि एक बड़ी वित्तीय योजना का हिस्सा बन गया है। बचत का वह बड़ा अंतर जो पहले डीजल/पेट्रोल कारों के मुकाबले मिलता था, अब काफी कम हो गया है।
प्रमुख इलेक्ट्रिक कारों पर वित्तीय प्रभाव: केस स्टडीज
2026 के नए टैक्स स्लैब लागू होने के बाद, कर्नाटक में इलेक्ट्रिक कारों की ‘ऑन-रोड’ कीमतों में भारी उछाल आया है। खरीदारों को अब यह समझना जरूरी है कि उनके पसंदीदा मॉडल पर इस बदलाव का सटीक वित्तीय प्रभाव क्या होगा। यहाँ हम तीन अलग-अलग श्रेणियों की लोकप्रिय कारों का विश्लेषण कर रहे हैं:
1. एंट्री-लेवल कारें: MG Comet और Tata Tiago EV
बजट सेगमेंट में आने वाली कारें, जिनकी एक्स-शोरूम कीमत आमतौर पर ₹7 लाख से ₹9.5 लाख के बीच होती है, अब 5% रोड टैक्स के दायरे में आती हैं।
- MG Comet EV: यदि इसकी कीमत ₹7.5 लाख है, तो पहले यह पूरी तरह कर-मुक्त थी। अब इस पर ₹37,500 का अतिरिक्त रोड टैक्स लगेगा।
- Tata Tiago EV: ₹9 लाख वाले वेरिएंट पर अब खरीदार को ₹45,000 ज्यादा चुकाने होंगे।
पंजीकरण शुल्क और बीमा मिलाकर, इन कारों की ऑन-रोड कीमत अब लगभग ₹50,000 तक बढ़ गई है, जो बजट खरीदारों के लिए एक बड़ा अंतर है।
2. मिड-रेंज एसयूवी: Tata Nexon EV और Mahindra XUV400
यह सेगमेंट कर्नाटक के मध्यम वर्ग के बीच सबसे लोकप्रिय है, और यहाँ टैक्स की दर 8% है।
- Tata Nexon EV: मान लीजिए इसके टॉप मॉडल की एक्स-शोरूम कीमत ₹18 लाख है। 2024 तक इस पर शून्य टैक्स था, लेकिन अब इस पर ₹1,44,000 का लाइफटाइम रोड टैक्स देना होगा।
- Mahindra XUV400: ₹16.5 लाख की कीमत वाले मॉडल पर अब ₹1,32,000 का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
इन मॉडलों के लिए ऑन-रोड खर्च में ₹1.5 लाख तक की वृद्धि देखी जा रही है, जो ईएमआई (EMI) योजना बनाने वाले ग्राहकों के मासिक बजट को प्रभावित करेगी।
3. प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहन: Hyundai IONIQ 5 और Kia EV6
प्रीमियम श्रेणी में ₹25 लाख से ऊपर की कारों पर 10% टैक्स लगता है। हालांकि यह दर 2024 के मध्य से ही प्रभावी थी, लेकिन 2026 के अधिनियम ने इसे और अधिक सख्ती से लागू किया है।
- Hyundai IONIQ 5: ₹46 लाख की एक्स-शोरूम कीमत पर ₹4.60 लाख का रोड टैक्स देना होगा।
- Kia EV6: ₹62 लाख की कीमत पर यह टैक्स ₹6.20 लाख तक पहुंच जाता है।
इन हाई-एंड वाहनों के लिए टैक्स का बोझ पेट्रोल/डीजल कारों (जो अक्सर 18-20% होता है) के करीब पहुंच रहा है, जिससे लग्जरी सेगमेंट में ईवी और आईसीई (ICE) वाहनों के बीच का अंतर कम हो गया है।
संक्षेप में, चाहे आप छोटी सिटी कार लें या लग्जरी एसयूवी, कर्नाटक में अब “टैक्स-फ्री” राइड का आनंद लेना संभव नहीं है।

अन्य राज्यों से कर्नाटक (Re-registration) आने वाले वाहन
यदि आप अपनी इलेक्ट्रिक कार किसी अन्य राज्य (जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र या तमिलनाडु) से कर्नाटक ला रहे हैं, तो कर्नाटक मोटर वाहन कराधान (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत अब आपको यहां भी रोड टैक्स का भुगतान करना होगा। पहले यह प्रक्रिया काफी रियायती थी, लेकिन अब पुराने वाहनों के लिए ‘मूल्यह्रास’ (Depreciation) के आधार पर टैक्स निर्धारित किया जाता है।
पुराने ईवी के लिए टैक्स कैलकुलेशन (Depreciation Table)
सरकार वाहन की उम्र के आधार पर लाइफटाइम टैक्स में छूट देती है। इसकी गणना वाहन के नए होने पर लगने वाले कुल टैक्स के प्रतिशत के रूप में की जाती है:
| वाहन की आयु |
देय लाइफटाइम टैक्स (अनुमानित) |
| 1 वर्ष से कम |
नए टैक्स का 93% से 95% |
| 2 से 3 वर्ष |
नए टैक्स का 85% से 88% |
| 5 से 7 वर्ष |
नए टैक्स का 60% से 70% |
| 10 वर्ष से अधिक |
नए टैक्स का 25% से 30% |
दूसरे राज्य से वाहन लाने की कानूनी प्रक्रिया
- NOC प्राप्त करना: सबसे पहले अपने मूल राज्य के आरटीओ (RTO) से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (No Objection Certificate) प्राप्त करें।
- कर्नाटक आरटीओ में आवेदन: वाहन को कर्नाटक लाने के 12 महीनों के भीतर स्थानीय आरटीओ में पंजीकरण (Re-registration) के लिए आवेदन करना अनिवार्य है।
- टैक्स का भुगतान: वाहन के मूल इनवॉइस (Invoice) और उम्र के आधार पर गणना किए गए रोड टैक्स का भुगतान करें।
- नया नंबर अलॉटमेंट: टैक्स भुगतान के बाद आपको ‘KA’ सीरीज का नया पंजीकरण नंबर आवंटित किया जाएगा।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यदि आप टैक्स भुगतान में देरी करते हैं, तो भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
क्या अब भी ईवी खरीदना फायदेमंद है?
कर्नाटक में 2026 के नए टैक्स नियमों के बाद भी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदना एक समझदारी भरा वित्तीय निर्णय बना हुआ है। हालांकि अब रोड टैक्स देना अनिवार्य है, लेकिन पारंपरिक पेट्रोल या डीजल वाहनों की तुलना में यह अभी भी काफी कम है। जहां पेट्रोल/डीजल कारों पर कर्नाटक में 14% से 18% तक भारी रोड टैक्स लगता है, वहीं ईवी पर यह दर केवल 5% से 10% के बीच है। यह टैक्स अंतर ही खरीदार को शुरुआत में ही लाखों रुपये की बचत करा देता है।
असली फायदा ‘रनिंग कॉस्ट’ (संचालन लागत) में छिपा है। पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे एक औसत कार चलाने का खर्च ₹8-₹10 प्रति किलोमीटर आता है, जबकि ईवी के लिए यह मात्र ₹1-₹1.50 है। भले ही रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ने से शुरुआती निवेश (Upfront Cost) बढ़ गया है, लेकिन यदि आप साल में 10,000 किलोमीटर से अधिक गाड़ी चलाते हैं, तो अगले 3-4 वर्षों में ईंधन की बचत आपके द्वारा दिए गए रोड टैक्स की भरपाई कर देगी। इसके अलावा, ईवी में मेंटेनेंस का खर्च भी 40% तक कम होता है। संक्षेप में, मध्यम और लंबी अवधि के उपयोग के लिए ईवी आज भी सबसे किफायती विकल्प है।
भविष्य की चुनौतियाँ और संभावनाएं
Karnataka EV Road Tax 2026 लागू होना केवल राजस्व बढ़ाने का जरिया नहीं, बल्कि भविष्य के चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का एक माध्यम है। सरकार इस टैक्स से प्राप्त धन का उपयोग राजमार्गों और शहरी क्षेत्रों में फास्ट-चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने के लिए करेगी। हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं; बैटरी कचरा प्रबंधन और बिजली ग्रिड पर बढ़ता बोझ बड़ी बाधाएं हैं।
जहां तक 2027-28 की बात है, विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि ईवी की पहुंच 30% से अधिक होती है, तो सरकार टू-व्हीलर्स पर भी टैक्स लगा सकती है या मौजूदा स्लैब में 2% की वृद्धि कर सकती है।
FAQ
नहीं, हाइब्रिड वाहनों पर पहले से ही उच्च दर (लगभग 18-21%) से टैक्स लगता है। 2026 के नए नियम विशेष रूप से पूर्णतः बैटरी चालित वाहनों (BEVs) के लिए हैं।
नहीं, यह टैक्स केवल 10 अप्रैल 2026 के बाद पंजीकृत होने वाले नए वाहनों पर लागू है। पुराने मालिकों को अतिरिक्त भुगतान की आवश्यकता नहीं है।
आप 'परिवहन सेवा' पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन या अपने नजदीकी आरटीओ (RTO) में पंजीकरण के समय 'लाइफटाइम टैक्स' जमा कर सकते हैं।
2026 के नियमों के अनुसार, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को अभी भी 0% रोड टैक्स की छूट दी गई है।
टैक्स की गणना वाहन की एक्स-शोरूम (Ex-showroom) कीमत पर की जाती है, न कि ऑन-रोड कीमत पर।
हाँ, 'री-रजिस्ट्रेशन' के समय वाहन की आयु के आधार पर आनुपातिक (Pro-rata) लाइफटाइम टैक्स देना अनिवार्य है।
₹25 लाख से अधिक की इलेक्ट्रिक कारों पर 10% लाइफटाइम रोड टैक्स लागू है।
हाँ, कमर्शियल ईवी और बसों पर अब 5% की दर से टैक्स लगाया गया है।